Sunday, April 25, 2010

'कश्ती..'


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"खंज़र घोंप दो..
सीने में आज..
जलता हूँ..
ऐसे भी..
यादों के समंदर..
जज़्बातों की कश्ती में..
मेरे महबूब..!!"

...

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