प्रियंकाभिलाषी..
Saturday, May 22, 2010
'बरकत..'
...
"निभा सकूँ..
बज़्म में चाहत..
ए-माज़ी..
जुनूं में..
बरकत..
अता हो..!"
...
1 comment:
संजय भास्कर
May 24, 2010 at 2:50 AM
वाह! ऐसी कवितों से जीने की उर्जा मिलती है.
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वाह! ऐसी कवितों से जीने की उर्जा मिलती है.
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