Saturday, May 22, 2010

'बिसात..'


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"डूबा हूँ..सैलाब-ए-दुनियादारी में..
दफ्न हुआ हूँ..जश्न-ए-रिवायत में..

मेरी बिसात क्या..तेरी अदालत..!!"

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7 comments:

  1. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

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  2. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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  3. धन्यवाद दिलीप जी..!!

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  4. धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!

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