Wednesday, May 26, 2010

'खज़ाना-ए-दिल..'




...

"दफ़ना आया हूँ..
वजूद..
रोज़-रोज़ की दलीलों ने..
ऐवें ही..
खज़ाना-ए-दिल..
बेज़ार किया..!!"

...

12 comments:

  1. WAAH!
    GOTHIYAAL JI NE SAHI KAHA..

    KUNWAR JI,

    ReplyDelete
  2. धन्यवाद उम्मेद जी..!!

    ReplyDelete
  3. धन्यवाद माधव जी..!!

    ReplyDelete
  4. धन्यवाद कुंवर जी..!!

    ReplyDelete
  5. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

    ReplyDelete
  6. कम शब्दों में गहरी बात कहना ,,,,,,गज़ब का अंदाज़ होता है ,,,यहाँ वही दिखा ....बधाई स्वीकारे ////!!! http://athaah.blogspot.com/

    ReplyDelete
  7. शब्दों के इस सफ़र में आज से हम भी आपके साथ है

    ReplyDelete
  8. धन्यवाद राजेंद्र मीणा जी..!!

    ReplyDelete
  9. धन्यवाद महफूज़ अली जी..!!

    ReplyDelete

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!