Tuesday, June 15, 2010

'तेरी महक.. माँ..'



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"संदूक में लिपटी रखी है..
मासूमियत में डूबी..
बचपन की सुनहरी..
यादों की झड़ी..

साथ ले आती हैं..
अनगिनत क्षण..
वो अपनापन..
मीठे आँसू..
मीलों फैली मुस्कुराहट..
सतरंगी आत्मीयता..

ताज़ी है..
अब तक..
तेरी महक..
माँ..!!"

...

4 comments:

  1. maaki mahak to marte dam tak aur uske baad bhi baaki rahegi...maa aur bharat maa tumhe naman...bahut sundar panktiyan

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  2. धन्यवाद दिलीप जी..!!

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  3. धन्यवाद उम्मेद जी..!!

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  4. धन्यवाद इन्डली जी..!!

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