प्रियंकाभिलाषी..
Thursday, August 12, 2010
' सिरहाने.. सो गयी..'
...
"शरमा के..
घबरा के..
आँचल दाँत में..
दबा के..
नज़रें चुराती..
इधर-उधर..
धमा-चौकड़ी मचा..
थक गयी..
जब..
यादों की पोटली..
सिरहाने..
सो गयी..
फिर-से ..!"
...
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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