प्रियंकाभिलाषी..
Wednesday, September 1, 2010
'लहू के कतरे..'
...
"चंद बिखरे लहू के कतरे..
उठाने की कोशिश..
बेमौत जला गयी..
शफ़क़त की चादर..!!"
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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