Thursday, September 23, 2010

'थक गया हूँ..'



"टुकड़ों में ढलती ज़िन्दगी..
ज़मीन-ए-रूह बंज़र..

शिकारी बिसात..
टूटे जज़्बात..

रेज़ा-रेज़ा ना-मुरादी..
रफ्ता-रफ्ता बेबसी..

थक गया हूँ..
फरेबी वीरानी से..!"

...

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!