Friday, October 29, 2010

'काविश-ए-मौत..'

<

...


"जिंदगानी लबों पे..
रखी है..
बुझ जाए..
रूह की आँधी..
गर..
समझ लेना..
इम्तिहाँ जीत आया..
काविश-ए-मौत..!!'

...

6 comments:

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!