Saturday, October 2, 2010

'अरमां ..'



...

"ए-ज़िन्दगी..
क़र्ज़ उतारने की चाहत..
हर्फ़ समेटने की राहत..

काश..
मुनासिब हो..
*कामिल हो..

ये अरमां कभी..!!"

...

*कामिल = पूरा होना..!!

7 comments:

  1. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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  2. bahut khub.....
    kuch to baat hai..

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  3. धन्यवाद शेखर सुमन जी..!!

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  4. धन्यवाद मृदुला प्रधान जी..!!

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  5. कित्ता अच्छा लिखती हैं आप ...बधाई.
    ________________

    'पाखी की दुनिया' में अंडमान के टेस्टी-टेस्टी केले .

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  6. धन्यवाद पाखी जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!