प्रियंकाभिलाषी..
Sunday, November 7, 2010
'जीवन-यापन के साधन..'
...
"असीमित आकाश..
मुट्ठी भर धरती..
अनगिनत स्वप्न..
स्वच्छ आत्मा..
करुण संस्कार..
विशाल ह्रदय..
सेवामयी भाव..
अमृत वाणी..
पर्याप्त है..
जीवन-यापन के साधन..!!"
...
1 comment:
संगीता स्वरुप ( गीत )
November 7, 2010 at 7:19 AM
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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बहुत सुन्दर प्रस्तुति
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