आज ईद पर अनगिनत मूक पशु-पक्षियों का क्रंदन हर ओर गूँज रहा है..दया और करुणा करें..अहिंसा का मार्ग अपनाएँ.. 'जियो और जीने दो'..!!
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"मूक पशुओं की सुनो पुकार..
करते क्रंदन..
भय व्याकुलता अशांति..
आज चहुँ ओर..
हुई व्याप्त है..
हिंसा के परमाणु बसे..
क्यूँ ह्रदय में..
प्रिय है जीवन उनको भी..
करो दान..
दो उनको 'अभयदान'..
विवेक का परिचय..
उदारता का हाव..
कृतज्ञ रहेंगे सदा..
फैलाओ करुणा भाव.!"
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aacha likha hai. ye pashu ki hathya rukni chaheye.
ReplyDeletepriuanka kaffi aacha hai.
aapne sab ke mann ki baat likh di he jo log keh nhi sakte he express nhi karte woh keh diya aap ne...
ReplyDeleteधन्यवाद अमित जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद मोहम्मद जी..!!
ReplyDeleteलाजवाब...प्रशंशा के लिए उपयुक्त कद्दावर शब्द कहीं से मिल गए तो दुबारा आता हूँ...अभी
ReplyDeleteमेरी डिक्शनरी के सारे शब्द तो बौने लग रहे हैं...
धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!!
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