Saturday, December 11, 2010

'नक़ाबी खंज़र..'



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"जो कहूँ तुझसे रंजिश नहीं..बगावत होगी..
बस्ती-ए-रूह..फरेबियों की वकालत होगी..

तमाशा खूब करते हैं..नक़ाबी खंज़र..!!"


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