Friday, December 17, 2010

'माँ..'





...


"तेरे हाथों की बरकत..
तेरी दुआओं की शफ़क़त..
तेरी पाक़ इबादत..
तेरे तब्बसुम की क़ायनात..

*कामरां हुआ..
जिस रोज़ दामन..
जुड़ा पहलू से..!!!"

...

*कामरां = Blessed/Fortunate..

5 comments:

  1. मां ही ईश्वर है और मां से बढकर कोई नहीं

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  2. बेहतरीन अभिव्यक्ति , मां के व्यक्तित्व को तराश कर रू-ब-रू कराने के लिये आभार व बधाई।

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  3. ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी .

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  4. माँ को बहुत अच्छे से परिभाषित किया है

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  5. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!