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"दहलीज़ की चौखट का तमाशा..देखो..
सुलगते बिखरते अरमान..देखो..
चाहत की कटोरियाँ..देखो..
मुस्कुराहाट की थालियाँ..देखो..
रिश्तों के सुनहरे चम्मच..देखो..
मखमली ख्वाब की मेज़..देखो..
शहनाईओं के हसीं गिलास..देखो..
गहराई का गुलदान..देखो..
चलो..
एक बार फिर से..
समेट लायें..
खुशियों का हलवा..!!"
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वाह..:) mujhe bhi khana hai....
ReplyDeleteधन्यवाद शेखर सुमन जी..!!
ReplyDeletekab kila rahe ho........muh me pani aagya
ReplyDeleteधन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
ReplyDeleteहलवा बेहद मन भाया। इसे तो खाया भी मन से ही जायेगा। प्याजो की जवानी
ReplyDeleteधन्यवाद अविनाश वाचस्पति जी..!!
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