Monday, January 17, 2011

'ख्व़ाब बेशुमार..'


...


"बिसात-ए-इश्क समझेंगे क्या..
वादा-ए-वफ़ा समझेंगे क्या..

गर्द निगल गया..ख्व़ाब बेशुमार..!!"


...

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!