Thursday, March 3, 2011

'दर-ए-यार..'





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"कितने मेहरबां मिले..
कितने गुलिस्तान खिले..

दर-ए-यार..तन्हा-तन्हा..!!!"


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1 comment:

  1. धन्यवाद मिथिलेश दुबे जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!