
...
"बाँधी जिस क्षण..
घेरों की डोरी..
चमका था सोना..
उछली थी चांदी..
मद्धम-मद्धम था उजाला..
भीनी थी चांदनी..
सुमन की सुगंध..
पर्वत की ओढ़नी..
जल की निर्मलता..
नदी की चाप..
घुँघरू की खनक..
सरगम की थाप..
माधुर्य का संगम..
अंतर्मन का मिलाप..
सुनो..
प्रिय..
अद्भुत सादगी..
अटूट विश्वास ही..
जीवन की धार..
सदैव रखना..
अपने समीप..
करना मेरा..
प्रेम स्वीकार..!!"
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bhut hi sundar.......behatrin rachna...
ReplyDeletebahut sundar bhavabhivyakti ...shubhkamnayen .
ReplyDeleteSunder manobhav...
ReplyDeleteबेहतरीन!!!!
ReplyDeleteधन्यवाद सत्यम शिवम जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद शिखा कौशिक जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद डॉक्टर शर्मा जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!
ReplyDeletebehad khubsurat...
ReplyDeletehamesha ki tarah
धन्यवाद Patali - The Village जी..!!
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