प्रियंकाभिलाषी..
Friday, May 6, 2011
'कागज़ के फूल..'
...
"आँचल तेरी यादों का..
रहने दे..
हम-ज़लीस..
थमेगी साँसों की डोरी..
बढाएंगे रंगत..
फ़क़त..
कागज़ के फूल..!!"
...
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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