Wednesday, June 15, 2011

'टुकड़े रूह के..'




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"कीमत चुका..
बांटा साज़-ओ-सामान..
ना कर सका..
टुकड़े रूह के..!!!"


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8 comments:

  1. क्या बात कही है...लाजवाब।

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  2. धन्यवाद सत्यम शिवम जी..!!

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  3. रूहों के टुकड़े नहीं हो सकते

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  4. धन्यवाद वर्मा जी..!!

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  5. धन्यवाद संगीता आंटी..!!

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  6. धन्यवाद कैलाश शर्मा जी..!!

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