
एक प्यारे-दोस्त का दिल अनजाने में दुखा दिया..उन के लिये..उन के नाम..एक गुज़ारिश..
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"दुखा दिल तेरा..
रोया मैं बहुत..
ना समझ सका..
रूह जो छिल गयी..
आँसू जो जम गए..
वहशत का हर लम्हा..
मंज़र-ए-तन्हाई..
आलम-ए-जुदाई..
गुनाह-ए-जुर्म..
हो सज़ा अता..
बेदखल यादों से..
बेताल्लुक जज्बातों से..!!"
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बहुत सुंदर शब्द ..जितना पड़ो मन नही भरता
ReplyDeleteखुदा करे...तुम्हारा वो दोस्त तुम्हारी गुजारिश मान लें...तुम्हें दिल से माफ कर दे...
ReplyDeleteकोई भी किसी को कभी यादों से बेदखल न करे...
बढ़िया है....
धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद दी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!
ReplyDeleteबेहतरीन रचना
ReplyDeleteधन्यवाद अमृता तन्मय जी..!!!
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