Wednesday, August 24, 2011

'आँखें..'




...


"हर नफ्ज़ लुभाती आँखें..
रूह से पर्दा उठाती आँखें..

ता-उम्र..तन्हा ही रहीं आँखें..!!"

...

10 comments:

  1. मन को लुभाती रचना ...सुन्दर...खूबसूरत ...

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  2. लाजवाब ... ये आँखें यूँ ही तनहा रहती हैं ..
    बेहद लाजवाब त्रिवेणी ...

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  3. धन्यवाद नारी शक्ति-शाश्वत शक्ति जी..!!

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  4. धन्यवाद सागर जी..!!

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  5. धन्यवाद महेश्वरी कनेरी जी..!!

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  6. धन्यवाद दिगंबर नासवा जी..!!

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  7. जबरदस्त....ये आँखें.

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  8. धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!

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