Monday, September 19, 2011

'वफ़ा के दरीचे..'



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"बेवफ़ा रहूँ..
ता-उम्र..
काफी है..

जिस्म से गिरते नहीं..
वफ़ा के दरीचे..!!"


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14 comments:

  1. गिरना भी नहीं चाहिए ...सुन्दर !

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  2. क्या बात है जी,प्रियाकाभिलाषी जी.
    वफ़ा के दरीचे के साथ बेवफा.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा न,
    आपका इंतजार है

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  3. Beautiful as always...

    ननिहाल की कुछ यादें 
    'आदत.. मुस्कुराने की' पर आकर नयी पोस्ट ज़रूर पढ़े .........धन्यवाद |

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  4. धन्यवाद राकेश कुमार जी..!!

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  5. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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  6. धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!

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  7. वाह ...बहुत खूब...गहन.

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  8. धन्यवाद शिखा वार्ष्णेय जी..!!!

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  9. भावों की सुंदर अभिव्यक्ति........

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  10. धन्यवाद महेश्वरी कनेरी जी..!!

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  11. धन्यवाद सागर जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!