
बस यूँ ही कुछ लिखा है आज..
...
"जाम-ए-उल्फत लिखा है आज..
रूह को बेगैरत लिखा है आज..१..
कहते हैं ख्वाइशों के रेले..कुछ..
बेगानों को अपना लिखा है आज..२..
कह दूं तो रंजिश होगी..ए-वाईज़..
हसरतों को पैगाम लिखा है आज..३..
साहिल हूँ वादियों का..ए-सनम..
तूने क्यूँ अपना हयात लिखा है आज..४..
सूनी है मुरादें..बारहां..मियाद लम्बी..
किस्सा नहीं बेज़ार लिखा है आज..५..
खलिश उठती है..तूफानी बस्ती..
महताब को कातिल लिखा है आज..६..!!!"
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यूँ ही लिखती रहो........यही दुआ है...
ReplyDeleteBahut khoobsurat!!
ReplyDeleteवाह! क्या लिखा है आज
ReplyDeleteधन्यवाद एम के मिश्र जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद चन्द्र भूषण मिश्र 'गाफिल' जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद मयंक साहब..!!
ReplyDeleteआभारी हूँ..!!
फिर से प्रशंसनीय रचना - बधाई
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा है आज....
ReplyDeleteधन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!
ReplyDeleteकह दूं तो रंजिश होगी ऐ वाईज...
ReplyDeleteवाह! बहुत उम्दा....
सादर...
धन्यवाद संजय मिश्रा 'हबीब' जी..!!!
ReplyDeleteबहुत गज़ब लिखा है आज!!
ReplyDeleteधन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
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