
...
"आज फिर..
सौदा होगा..
कुछ जज्बातों का..
कुछ ख्वाईशों का..
कुछ अरमानों का..
दफ़्न किये जायेंगे..
बेखुदी के दरिया कितने..
इबादत के फ़साने कितने..
रूदाद-ए-मोहब्बत कितने..
जलाये जायेंगे..
कदीम ख़त सारे..
क्यूँ लिखे थे तूने..
एहसां इतने..
बिखर रहा हूँ..
फ़क़त..
आये नहीं..
मेहरबां कोई..!!!"
...
bhaut hi acchi....
ReplyDeleteचाँद लफ़्ज़ों में बहुत बड़ी बात कह गयीं हैं आप
ReplyDeleteबधाई
jo bhi humdard hain ...zaroor aayenge...laakh jatan kar lo,tum.....rokne ka
ReplyDeleteबेहतरीन शब्द चयन और बहुत ही सशक्त भावाभिव्यक्ति ! अति सुन्दर !
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।
ReplyDeleteधन्यवाद सागर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद दी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद सदा जी..!!!
ReplyDeleteधन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDelete