
कुछ वर्षों पहले लिखी थी..बिना कोई संशोधन पुनः प्रेषित हैं..
...
"बचपन सहेजकर रखा था..
एक पुराने बक्से में..
कुछ खिलौनें..
कुछ गुड़िया..
कोई कश्ती..
कोई गदा..
कुछ तीर-कमान..
कुछ आँसू की पुड़िया..
कोई ताबीज़..
कोई धागा..
कुछ भूली-बिसरी यादें..
कुछ गुलमोहर के फूल..
कुछ इमली के बीज..
कुछ बगीचे की धूल..
थोड़ी मासूम-सी हाथापाई..
कुछ पुराने सिक्के..
कुछ गुड़ के चक्के..
कुछ सरसों और मक्के..
थोड़े पुराने ख़त..
कुछ तितालियों के रंग..
कुछ दरिया का पानी..
कुछ चबूतरे तंग..
कुछ खिलखिलाती तस्वीरें..
कुछ कुरते के बटन..
कुछ जूतों की तस्में..
कुछ यारों के टशन..
दीवाली की सफाई में..
सब बेच दिया है..
सुना है..
मार्केटिंग वाले..
सब एक्सेप्ट करते हैं..
इस फेस्टिव सीज़न में..!"
...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं
ReplyDeleteबहुत खूब प्रियंका जी।
ReplyDeleteआपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ!
सादर
bhaut khub...happy diwali....
ReplyDeleteधन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!
ReplyDeleteबहुत गलत किया ...कि बेच दिया...मार्केटिंग वालों का क्या है उनका तो यह काम ठहरा पर बचपन ...जो लौट कर नहीं आ सकता....जिसको ..जिससे जुडी यादों को सहेज कर रखना है...उन्हें कोई क्यूँ कर बेचे भला...
ReplyDeleteइस रंग बदलती दुनिया में यादें ही तो अनमोल होती हैं ...उन यादों को उनसे जुडी बातों को...चीज़ों को ...कौन बेचेगा भला....और फिर माना कि हर चीज़ का एक प्राइज़ टैग होता है पर तब भी कुछ चीज़ें बिकाऊ नहीं होतीं...
अच्छा व्यंग्य है जो अपने साथ एक टीस भी समेटे हुए है...
बहुत गलत किया ...कि बेच दिया...मार्केटिंग वालों का क्या है उनका तो यह काम ठहरा पर बचपन ...जो लौट कर नहीं आ सकता....जिसको ..जिससे जुडी यादों को सहेज कर रखना है...उन्हें कोई क्यूँ कर बेचे भला...
ReplyDeleteइस रंग बदलती दुनिया में यादें ही तो अनमोल होती हैं ...उन यादों को उनसे जुडी बातों को...चीज़ों को ...कौन बेचेगा भला....और फिर माना कि हर चीज़ का एक प्राइज़ टैग होता है पर तब भी कुछ चीज़ें बिकाऊ नहीं होतीं...
अच्छा व्यंग्य है जो अपने साथ एक टीस भी समेटे हुए है...
आपकी पोस्ट की हलचल आज (29/10/2011को) यहाँ भी है
ReplyDeleteनिधि जी की बातों से पूरी तरह सहमत ...
ReplyDeleteलेकिन रचना में गज़ब का प्रवाह है ..बहुत मीठी सी यादें बचपन की ..
Wah, kya baat hai...
ReplyDeleteSimple yet impressive creation...
www.poeticprakash.com
बहुत ही भावमय करते शब्दों का संगम ।
ReplyDeleteप्यारी यादें!
ReplyDeleteधन्यवाद संगीता आंटी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद प्रकाश जैन जी..!!!
ReplyDeleteधन्यवाद अनुपमा पाठक जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!
ReplyDeleteआभारी हूँ..!!
धन्यवाद अनुपमा पाठक जी..!!
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