Wednesday, November 9, 2011

'चाहत मेरी..'



...


"माँगता रहा..
ता-उम्र..
चाहत मेरी..
ना भर दामन उसका..
आज फिर गिरा आया हूँ..
हाँ..
आज फिर..
अपना ईमां..!!"


...

6 comments:

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!