वाह वाह ..
बेहतरीन शब्द सयोजन भावपूर्ण रचना.......
खुद से झगडा कुछ ऐसे ही होता है
जब कुछ नहीं कर पाते तो खुद से ही नाराज़ होना ही रह जाता है...बाक़ी
धन्यवाद सुनील कुमार जी..!!
धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!
धन्यवाद शेफाली जी..!!
धन्यवाद दी..!!
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
वाह वाह ..
ReplyDeleteबेहतरीन शब्द सयोजन भावपूर्ण रचना.......
ReplyDeleteखुद से झगडा कुछ ऐसे ही होता है
ReplyDeleteजब कुछ नहीं कर पाते तो खुद से ही नाराज़ होना ही रह जाता है...बाक़ी
ReplyDeleteधन्यवाद सुनील कुमार जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!
ReplyDeleteधन्यवाद शेफाली जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद दी..!!
ReplyDelete