Tuesday, December 6, 2011

'ज़र्रा-ज़र्रा..'



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"ज़र्रा-ज़र्रा बिक रहा था ईमां..
रेज़ा-रेज़ा लूटा रहा था वफ़ा..

अजीब है..दास्तान-ए-गलियारे-ए-सियासत..!!!"

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9 comments:

  1. बहुत खुबसूरत

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  2. बहुत अच्छा लिखा है ..

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  3. बहुत सुन्दर प्रविष्टि...बधाई

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  4. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-722:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  5. धन्यवाद शेफाली जी..!!

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  6. धन्यवाद चन्द्र भूषण मिश्र 'गाफिल' जी..!!

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  7. धन्यवाद दिलबाग विर्क जी..!!

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  8. धन्यवाद अतुल श्रीवास्तव जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!