Wednesday, March 28, 2012

'बादाम की सेज..'

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"कुछ ख़ास हुआ..
आज सवेरे..
तेरे-मेरे दामन पर..
स्ट्रोबैरी, हनी और क्रीम..
बादाम की सेज पर सजे कुछ ऐसे..
खिल उठा मेरा जिस्म..
महक उठी तुम्हारी रूह..!!"

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4 comments:

  1. बहुत सुन्दर स्रजन किया है आपने!

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  2. ह्म्म्म्म्म्म ..जिस्म के खिलने ..रूह के महकने के ये तरीके लुभावने हैं.

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