प्रियंकाभिलाषी..
Saturday, May 26, 2012
'मंज़र..'
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"बारिशों के मेले..
सजे भरी-दोपहर..
गर्मी मेरी साँसों की..
नरमी तेरी आहों की..
ना देखा..
ना सुना..
मंज़र रूमानी ऐसा..!!"
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Thursday, May 24, 2012
'वो भरी-दोपहर..'
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"प्यासा दरिया..
पत्तों की सरसराहट..
खामोश दरख्त..
घना जंगल..
स्याह जज़्बात..
मुलायम एहसास..
नर्म साँसें..
सुर्ख होंठ..
वस्ल-ए-जिस्म..
'ऑलिव ओइल'..
चन्दन-लेप..
उफ़..
क्या कहर ढाता है..
'वो भरी-दोपहर' का प्यार..
है न..
ए-राज़दां..!!"
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Friday, May 11, 2012
'अभिलाषा..'
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"चलने का प्रयोजन..
न पता था..
जिस क्षण दिया..
हाथ में हाथ..
किंचित ही भ्रम था..
अर्पित कर स्वयं..
मुक्ति-द्वार की अभिलाषा..
अवतरित हो हे-ईश..
बुझाओ तुच्छ-पिपासा..!!"
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Thursday, May 10, 2012
'कारवां..'
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"कमी हो जो भी..
लिख जाना..
जुदाई की लम्बी रातों में..
मिलना मुनासिब कहाँ..
यादों के कारवां..!!"
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Sunday, May 6, 2012
'अधूरे सपने..'
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"अधूरे सपने..
जुस्तजू..
अरमां..
हसरत..
और..
इक मंजिल..!!"
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Wednesday, May 2, 2012
'साहिल..'
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"शर्मिंदा होतीं हूँ हर सुबह..
रात भर साथ ना दे पाने को..
क्या काबिल है मेरा काफिला..
साहिल पे डूब जाने को..!!!"
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'महफ़िल..'
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"कभी मदमस्त राहें चूमा करती थीं..
खामोशी के काफिले..
आज तनहा हो चले..
महफ़िल के साहिल..!!"
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