प्रियंकाभिलाषी..
Sunday, May 6, 2012
'अधूरे सपने..'
...
"अधूरे सपने..
जुस्तजू..
अरमां..
हसरत..
और..
इक मंजिल..!!"
...
2 comments:
दिगम्बर नासवा
May 7, 2012 at 4:40 AM
इक मंजिल ....
जो कभी नहीं मिलती ...
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Nidhi
May 10, 2012 at 7:22 PM
अधूरा अधूरा सा....यह आधा पूरा सा
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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इक मंजिल ....
ReplyDeleteजो कभी नहीं मिलती ...
अधूरा अधूरा सा....यह आधा पूरा सा
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