प्रियंकाभिलाषी..
Wednesday, July 18, 2012
'विधि-विधान..'
...
"आना-जाना खेल जीवन का..
विधि-विधान बदल सके न कोई..
सुख-दुःख:..लेखा-जोखा..
भोग करे फसल जितनी बोई..!!!"
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2 comments:
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
July 18, 2012 at 4:31 AM
जीवन इक खेल तमाशा है...
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priyankaabhilaashi
August 9, 2012 at 12:03 AM
धन्यवाद मयंक साहब..!!
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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जीवन इक खेल तमाशा है...
ReplyDeleteधन्यवाद मयंक साहब..!!
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