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"आप क्यूँ उकेर देते हैं ऐसा सत्य, जिसका कोई विकल्प हो ही नहीं सकता..??? क्यूँ लिखते हैं आप ऐसा जिससे ना जाने कितनों के घाँव हरे हो जाते हैं..?? क्यूँ लेते हैं आप परीक्षा उन प्रश्नों से, जिनके उत्तर कहीं भी नहीं मिल सकते कभी..?? क्यूँ आप उस धरती को झकझोरते हैं जिससे अस्तित्व स्वयं ही अपना अस्तित्व भूल जाता है..??
मत करिए ऐसा..बहुत एकाकी जीवन है मेरा, रहने दीजिये ना इसे वैसे ही..!!!"
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लागी छूटे न........................
ReplyDeletetere bin jiya jaay na..........! Behtreen lekhan.
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