प्रियंकाभिलाषी..
Wednesday, December 12, 2012
'अशआर..'
...
"हीरा..पन्ना..माणक..
अज़ीज़ बेशुमार..
ना भूला सका..
ना सुलगे अशआर..!!!"
...
1 comment:
अरुन अनन्त
December 12, 2012 at 11:58 PM
वाह उम्दा लाजवाब सुन्दर रचना
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चाह है उसकी मुझे पागल बनाये
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