Tuesday, December 25, 2012

'कील-ए-वज़ूद..'




...

"जा..
लौट जा..
साहिब मेरे..

कमजोर इतना नहीं..
रूह बेच दूँ..

बेगैरत इतना नहीं..
ज़मीर टांग दूँ..
कील-ए-वज़ूद पे तेरी..!!!"


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1 comment:

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!