प्रियंकाभिलाषी..
Thursday, January 17, 2013
'साज़-सज्जा..'
...
"बिजली रोक सकती नहीं..
ह्रदय-पट पर उमड़ी कहानी..
कागज-कलम बुला रहे..
करो साज़-सज्जा पुरानी..
पत्र ढूँढती होगी प्रेयसी..
लगाओ राग कोई मस्तानी..!!"
...
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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