Sunday, June 9, 2013

'फ़रियाद..'



...

"मेरे रहगुज़र में करीब..
मेरी ज़िन्दगी के हबीब..

जा लौट जा..

संग-सी चाहत..
और..
फ़रियाद..

मुमकिन नहीं..!!"


...

2 comments:

  1. आज सुबह में ये गीत को याद किया था ...... ये भी तो इक फ़रियाद ही है .....लौटते तब न जब आते ......यहाँ तो न आया ......न बुलाया गया की बात है .............!!!

    हम से आया न गया तुम से बुलाया न गया
    फ़ासला प्यार में दोनों से मिटाया न गया .......

    देखते देखते दिन ढल गया , और रात हुई
    वो सामान आज तलक दिल से भुलाया न गया

    किस्मतें अपनी बनाई हैं बिगड़ने के लिए
    प्यार का बाग़ बसाया था उजड़ने के लिए
    इस तरह उजड़ा के फिर हम से बसाया न गया ..................

    संग की चाहत को ही मिटा दी हो तो फिर फ़रियाद नामुमकीन सी लगने लगती है ......

    ReplyDelete
  2. धन्यवाद नयंक साब..!!

    ReplyDelete

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!