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"रक्तरंजित ह्रदय का पारितोषिक वितरण समारोह सजता है प्रतिदिन रात्रि के पहले और दूसरे प्रहर.. मैं अविभाजित-सा श्वांस-तंत्र को सहलाता हूँ.. भरता हूँ विभिन्न चित्रों के रंग और मांजता हूँ तूलिका के सीप..!!!
तुम मढ़ते हो 'चरित्र प्रमाण-पत्र'..होती है जिसकी लिखावट स्याह-सी स्याही से..!!"
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--जीवन-प्रणाली पर महत्वपूर्ण शोध..
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