प्रियंकाभिलाषी..
Monday, March 3, 2014
'स्याही-सी रंगत..'
...
"रहने दो पलकों को यूँ ही..
झाँकतीं मेरे भीतर..
स्याही-सी रंगत उड़ेल..
रीत जाने दो..मीत मेरे..!!"
...
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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