Sunday, July 27, 2014

'उथल-पुथल..'






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"तेरी स्मृतियों के चिन्ह यथावत हैं..
उथल-पुथल कितनी भी हो..भीतर..!!"

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2 comments:

  1. मन को छूती सुन्दर अभियक्ति ----
    बधाई--


    आग्रह है -- नदारत हो जायेगी धूप ------

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  2. धन्यवाद ज्योति खरे जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!