Monday, January 26, 2015

'बेहिसाब ज़ुल्म..'




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"तुम्हारा क़त्ल करना..या.. यूँ कहूँ..तुमसे मेरा क़त्ल होना..मुझे बेहद पसंद है..!! काँच के नाज़ुक सितारे..माणक के ज़ालिम लश्कारे..बेहिसाब ज़ुल्म ढाते हैं..!!"

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--तोहफ़ा-ए-यार #1



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