प्रियंकाभिलाषी..
Thursday, April 30, 2015
'पुर्ज़ों की स्याही..'
...
"इक पता तलाशता हूँ..अपनी ज़मीं से दूर..
इक आह संभालता हूँ..अपने जिस्म से दूर..
इक संदर्भ खंगालता हूँ..अपनी जिरह से दूर..
पुर्ज़ों की स्याही..विस्मित-सी..करे अनंत सवाल..!!"
...
No comments:
Post a Comment
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
‹
›
Home
View web version
No comments:
Post a Comment
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!