
...
"ये तेरे मेरे बीच का..
साइलैंस..
क़हर दोनों पे ढाता है..
जानती हूँ..
सोते नहीं हो..
रातों को..
मेरे बिन..
ख़ुशबू..गिरफ़्त..
जाने कैसा ये नाता है..
सदियों को जीया..
जिस-जिस पल..
दर्द अपना..
हर शब सुनाता है..
पैच-अप की गुंजाइश रखना..
लिखा मेरे पास..
नोक-झोंक का खाता है..
पक्के रंग..मोहब्बत वाले..
रंगरेज़ चढ़ा गया जिस्म पे..
फबे जिसपे तेरी छुअन..
रूह का कपड़ा..ऐसा ही आता है..!!"
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--रॉ..प्योर रॉ..प्योर शॉट्स..प्यारे थॉट्स..
बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति..
ReplyDeleteसादर आभार..दिलबाग विर्क जी..!!
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद कैलाश शर्मा जी..!!
ReplyDeleteसुन्दर रचना
ReplyDeleteahsaso k potali se lagi aapaki rachna
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद शिव राज शर्मा जी..!!
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद डॉ. अपर्णा त्रिपाठी जी..!!
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत ख्याल है ...
ReplyDeleteकभी कभी साईलेंस और करीब ले आता है ...
बहुत शानदार आपको बहुत बधाई
ReplyDeleteसादर धन्यवाद दिगंबर नास्वा जी..!!
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद मदन मोहन सक्सेना जी..!!
ReplyDeleteसादर आभार चंद्रभूषण मिश्र 'गाफ़िल' जी..!!
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