प्रियंकाभिलाषी..
Thursday, October 22, 2015
'लकीरें..'
...
"कश्ती के सैलाब थे..
या..
मोहब्बत के ज़ख्म..
फ़क़त..
रंगों की तहज़ीब..
औ'..
लकीरें बह गयीं..!!"
...
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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