*ख़त १२३*
प्यारे साहेब,
किस्सों ने जितना आराम दिया इस दिल को.. कोई और होता तो कबका रस्ता बदल लेता.. कुछ साथ जीवन भर के लिए होते हैं, फिर कोई भी मौसम हो या कोई भी साज़..
बेख़बर रहना भी कभी-कभी सुकूं से भर देता है दिल की वादियाँ.. ख़ुमारी की बारिशें और बेफ़िक्री के कनात, कुछ खुशियाँ दिल से उगकर आँखों में अपना डेरा जमातीं हैं..
मुझे इश्क़ है उन बेशकीमती तोहफ़ों से, यारियों के चौक से निकल आसमां के सितारों तक अपनी सतरंगी झालर लगाते हैं.. और हम चहकते-महकते ख़ुद का 'मैं' पा जाते हैं..
मुझे अथाह प्रेम है उन निर्मल कोशिकाओं से, जिनमें अनवरत बहतीं हैं सीधी-सच्ची-अधपकी-नरम भावनाओं की विराट नाव..
मुझे बेइंतहा मोहब्बत है उन मजबूत पोरों से, जिनकी खुशबू से दमक उठतीं हैं आज़ादियाँ..
अर्ज़ियों के दौर में मेरा ठिकाना तुम ही रहे.. आलिंगन की बैठक में, मेरे प्रिय यथार्थ तुम ही रहे.. उत्सवों की भागदौड़ में, मेरे गुलमोहर तुम ही रहे..
यूँ ही बरबस लिखता रहे, रूह का हथकढ़ तेरा नाम.. के तुमसे ही मुमकिन दोस्ती की पहचान..
स्नेह बरसता रहे, सदैव..❣️
--#प्रियंकाभिलाषी
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