Saturday, December 26, 2009

माँ..


...

"आती है याद जब भी...
नम हो जातीं हैं आँखें..

मिलता हूँ जब भी..
खिल जातीं हैं बाँछें..

त्याग की सूरत हो तुम..
मन-मंदिर की मूरत हो तुम..

बौना हो जाता हूँ..
वात्सल्य के पर्वत के आगे..

माँ..
तुझको नमन..

तुझको अर्पण..
सारी उपलब्धियाँ..!"

...

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना है माँ से बढ कर कोई देव नहीं कोई धर्म नहीं शुभकामनायें

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  2. बहुत सुन्दर रचना!! बधाई\

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  3. भावपूर्ण रचना...

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  4. आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद..!!

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  5. sach me ma ke upar jo bhi lika hai vo padkar ma ki yaad aayi. really very nice written

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!