Saturday, December 26, 2009


...

"तुम भी ना..
लकीरें हिला गए..

जिस्म सुलगता गया..
तस्सल्ली खिला गए..

आशियाँ लुटता गया..
जाम पिला गए..

साँसें बिफरती रहीं..
दूरियाँ मिटा गए..

आसमान रोता रहा..
स्याही मिला गए..

आज फिर..

शब ढूँढती रही..
अरमां लिटा गए..!"

...

3 comments:

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!