प्रियंकाभिलाषी..
Wednesday, January 20, 2010
'बचपन की मासूमियत..'
...
"वो सूना आंगन..
वो ठूंठ आम..
वो पगडंडी ..
वो बे-जार तन्हाई..
अब तक पड़ी है..
सांसों से चिपकी..
आंखों से लिपटी..
यादों में सिमटी..
बचपन की मासूमियत..!"
...
2 comments:
अजय कुमार
January 20, 2010 at 8:35 PM
अच्छे भाव वाली रचना
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priyankaabhilaashi
January 26, 2010 at 3:19 AM
धन्यवाद अजय कुमार जी..!!
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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अच्छे भाव वाली रचना
ReplyDeleteधन्यवाद अजय कुमार जी..!!
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