Friday, January 22, 2010

'घुटन साँसों की दबाऊँ कैसे..'


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"ज़ार-ज़ार ख्वाबों को सजाऊँ कैसे..
अश्कों की दहलीज़ को छुपाऊँ कैसे..१


वहशत के शोर में उलझी फिजायें..
घुटन मेरी साँसों की दबाऊँ कैसे..२


अजब है..रिवायत-ए-महफिल..
शिकवा खुदा को दिखाऊं कैसे..३


बारहां..झुलसता रहा लम्हों में..
साए जुल्फ-ए-रंगत बहाऊँ कैसे..४


इक खलिश-सी ज़िंदा है अब-तलक..
रंगत-ए-नासूर फिर..जमाऊँ कैसे..५


नजाकत-ए-दौर..ख़ाक हुआ इस मौसम..
इबादत-ए-शिकन आज सुखाऊँ कैसे..६..!"


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4 comments:

  1. वाह क्या खूब लिखी हो !! शुभकामनाएँ , ऐसे ही लिखती रहो !!
    गंतान्त्रदिवास की शुभकामनाएँ !

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  2. धन्यवाद कुसुम जी..!!

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  3. excellent work.... written staright from the heart

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  4. धन्यवाद भाविन जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!